धर्मेंद्र की 5 सदाबहार फिल्में और उनके दमदार डायलॉग्स:
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| Image Credit: @aapkadharam (Official Instagram) |
नमस्ते दोस्तों! धर्मेंद्र का नाम सुनते ही एक ऐसे अभिनेता की छवि सामने आती है, जिन्होंने अपनी दमदार एक्टिंग, एक्शन और मासूमियत से लाखों दिलों पर राज किया है। उन्हें बॉलीवुड का "ही-मैन" और "गर्म-धरम" भी कहा जाता है। उनकी फ़िल्में बस मनोरंजन नहीं करतीं, बल्कि एक जज़्बा, जुनून और ज़िंदगी के असली रंग भी बिखेरती हैं।
धर्मेंद्र जी ने अपने लंबे करियर में 300 से ज़्यादा फिल्मों में काम किया है। उनकी फिल्मों में एक्शन, रोमांस, और कॉमेडी तीनों का तड़का लगाते हैं। लेकिन कुछ ऐसी फिल्में हैं, जो वक़्त के साथ और भी ख़ास हो गई हैं। अगर आपने इनमें से कोई फिल्म नहीं देखी तो सच में, आप बॉलीवुड के एक सुनहरे दौर को मिस कर रहे हैं!
आज, मैं आपको धर्मेंद्र जी की 5 ऐसी शानदार फिल्मों के बारे में बताने जा रहा हूँ, जिन्हें हर उम्र का दर्शक बार-बार देखना पसंद करता है। साथ ही, उन फिल्मों के सुपरहिट डायलॉग्स भी, जो आज भी लोगों की ज़ुबान पर हैं।
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शोले (Sholay - 1975): दोस्ती और दुश्मनी की मिसाल
"शोले" सिर्फ एक फ़िल्म नहीं, बल्कि भारतीय सिनेमा का एक इतिहास है! इस फिल्म ने दोस्ती की परिभाषा को ही बदल दिया। धर्मेंद्र (वीरू) और अमिताभ बच्चन (जय) की जोड़ी, गब्बर सिंह का आतंक, बसंती की चुलबुली बातें - सब मिलकर एक ऐसा जादू बुनते हैं, जो आज 50 साल बाद भी ताज़ा है। यह फिल्म आपको हंसाएगी, रुलाएगी, और अपने अंत में गहरा संदेश दे जाएगी।
धर्मेंद्र का रोल (वीरू): वीरू एक मस्तमौला, दिलफेंक और बहादुर दोस्त है, जो बसंती से प्यार करता है। उसकी शरारतें और जय के साथ उसकी केमिस्ट्री इस फिल्म की जान हैं। वो सीन याद कीजिए जब वो शराब पीकर पानी की टंकी पर चढ़ जाता है!
शोले (Sholay - 1975): वीरू के कुछ 'गरम' डायलॉग्स
"बसन्ती, इन कुत्तों के सामने मत नाचना।" (ये डायलॉग सुनकर आज भी रोंगटे खड़े हो जाते हैं, दोस्त का अपनी प्रेमिका के लिए इतना गुस्सा!)
"अरे ओ सांभा, कितना इनाम रखा है सरकार हम पर?" (गब्बर के साथ मस्ती-मज़ाक वाला ये डायलॉग आज भी मशहूर है, हालांकि ये गब्बर का डायलॉग है, लेकिन वीरू के सामने ही बोला गया था!)
क्यों देखनी चाहिए: दोस्ती, एक्शन, शानदार गाने और एक बेहतरीन कहानी के लिए। यह फिल्म हर भारतीय को कम से कम एक बार तो ज़रूर देखनी चाहिए।
चुपके चुपके (Chupke Chupke - 1975): कॉमेडी का किंग!
अगर आपको लगता है कि धर्मेंद्र सिर्फ एक्शन हीरो थे, तो "चुपके चुपके" देखकर आपका ये भ्रम टूट जाएगा। यह एक प्योर कॉमेडी फिल्म है, जिसमें धर्मेंद्र जी ने एक प्रोफेसर की भूमिका निभाई है, जो अपनी नई-नवेली पत्नी के जीजाजी (उत्पल दत्त) के साथ एक मज़ेदार मज़ाक करता है। उनकी मासूमियत और हास्य टाइमिंग लाजवाब है।
धर्मेंद्र का रोल (प्रो. परिमल त्रिपाठी): एक शरारती पति, जो अपने भोले-भाले ड्राइवर 'प्यारे मोहन' का रोल निभाता है ताकि अपनी पत्नी के विद्वान जीजाजी को थोड़ा सबक सिखा सके।
चुपके चुपके (Chupke Chupke - 1975): परिमल के 'भोले-भाले' डायलॉग्स
"इंसान का नाम 'ओ' से खत्म नहीं होता, 'ई' से खत्म होता है, जैसे 'प्यारे' का 'प्यारेमोहन'!" (सही हिंदी में बोलने की कोशिश में मजेदार गलतियाँ!)
"हम तो आप ही के यहाँ के हैं। ड्राइवर हैं, मोटर चलाते हैं।" (एक विद्वान प्रोफेसर का ड्राइवर बनना और फिर भी अपनी विद्वता न छुपा पाना!)
क्यों देखनी चाहिए: अगर आपको हल्की-फुल्की और ज़बरदस्त कॉमेडी पसंद है, तो ये फिल्म आपके लिए है। अमिताभ बच्चन और धर्मेंद्र की मज़ेदार केमिस्ट्री भी इस फिल्म में देखने को मिलती है।
प्रतिज्ञा (Pratigya - 1975): देसी एक्शन का मज़ा
"प्रतिज्ञा" धर्मेंद्र की उन एक्शन फिल्मों में से है, जिसने उन्हें एक्शन हीरो के तौर पर और ज्यादा मज़बूत किया। ये कहानी है एक ऐसे नौजवान की, जो अपने पिता की मौत का बदला लेने के लिए डाकू बन जाता है। धर्मेंद्र जी का देहाती, देसी अंदाज और गुस्सा देखने लायक है। इस फिल्म में उनकी और हेमा मालिनी की जोड़ी भी बहुत पसंद की गई थी।
धर्मेंद्र का रोल (अजीत): एक बदला लेने वाला डाकू, जो अंदर से सीधा-सादा और नेक है। उसका डाकू वाला पहनावा और बेबाक बोल इस किरदार को यादगार बनाते हैं।
प्रतिज्ञा (Pratigya - 1975): अजीत के 'बदले' वाले डायलॉग्स
"जो किसानों के खून से अपनी प्यास बुझाते हैं... उन्हें सिर्फ़ ज़मीन ही नहीं... आसमान भी नहीं बख्शता!" (गरीबों के हक के लिए लड़ने वाले का दमदार ऐलान!)
"अगर मैं तेरी क़ब्र पर फातिहा पढ़ने आ गया, तो खुदा कसम, खुद क़ब्र भी रो पड़ेगी!" (अपने दुश्मन को ललकारने का अंदाज़!)
क्यों देखनी चाहिए: एक्शन, बदला, गांव की कहानी और धर्मेंद्र का टिपिकल 'देहाती' हीरो वाला अंदाज़ देखने के लिए, ये फिल्म एकदम परफेक्ट है।
मेरा गांव मेरा देश (Mera Gaon Mera Desh - 1971): दिलदार लुटेरा
ये फिल्म भी एक तरह से डाकू-पुलिस की कहानी है, लेकिन इसमें धर्मेंद्र का किरदार थोड़ा अलग है। वो एक ऐसा चोर है, जिसे पुलिस एक ख़तरनाक डाकू (विनोद खन्ना) को पकड़ने के लिए इस्तेमाल करती है। फिल्म की लोकेशन, गाने और एक्शन सीक्वेंस बहुत ही लाजवाब हैं। इसी फिल्म के बाद ही धर्मेंद्र का 'देसी जट' लुक और भी फेमस हो गया।
धर्मेंद्र का रोल (अजित सिंह): एक छोटे-मोटे चोर से लेकर गाँव का रक्षक बनने तक का उसका सफर बहुत प्रेरणादायक है। उसका शरारती दिल और मदद करने का जज़्बा इस किरदार की ख़ासियत है।
मेरा गांव मेरा देश (Mera Gaon Mera Desh - 1971): अजित सिंह के 'मनमौजी' डायलॉग्स
"आया हूँ तो कुछ लेकर ही जाऊँगा... या तो इनाम, या फिर अपनी जान!" (अपनी हिम्मत और दिलेरी दिखाने का अंदाज!)
"इस देश में दो ही तरह के आदमी हैं... एक वो जो ज़मीन जोतता है, दूसरा वो जो लोगों के दिल जोतता है।" (ज़िंदगी का सच्चा फलसफा!)
क्यों देखनी चाहिए: देहाती बैकग्राउंड पर बनी एक रोमांटिक-एक्शन फिल्म, जिसमें दो बड़े स्टार्स (धर्मेंद्र और विनोद खन्ना) का आमना-सामना देखने को मिलता है।
यमला पगला दीवाना (Yamla Pagla Deewana - 2011): फैमिली फन!
पुरानी फिल्मों के बाद, अब बात करते हैं उनकी नई पीढ़ी की फिल्म की। "यमला पगला दीवाना" में धर्मेंद्र जी ने अपने दोनों बेटों सनी देओल और बॉबी देओल के साथ काम किया। ये एक कॉमेडी और इमोशन से भरपूर फिल्म है, जहाँ धर्मेंद्र जी अपने पुराने, शरारती और रोमांटिक अंदाज़ में नज़र आते हैं। यह साबित करता है कि असली ही-मैन कभी बूढ़ा नहीं होता!
धर्मेंद्र का रोल (परमवीर सिंह ढिल्लों): एक शराब पीने वाला, दिलदार ठग पिता, जो अपने बेटों के साथ मिलकर मस्ती और धोखाधड़ी करता है। उनका मज़ाकिया अंदाज़ एक बार फिर लोगों को हँसाने में कामयाब रहा।
यमला पगला दीवाना (Yamla Pagla Deewana - 2011): परमवीर सिंह के 'मस्तमौला' डायलॉग्स
"पगला! मुझे मत सिखाओ, मैंने ज़िंदगी में इतने पापड़ बेले हैं कि तुम पापड़ी चाट खोल सकते हो!" (अपने अनुभव को मजाकिया ढंग से बताने का अंदाज!)
"दारू एक औरत जैसी होती है... शुरू में अच्छी लगती है... बाद में रुलाती है!" (हास्य और सच्चाई का मिश्रण!)
क्यों देखनी चाहिए: अगर आप देओल फैमिली को एक साथ कॉमेडी करते देखना चाहते हैं, तो यह फिल्म आपको निराश नहीं करेगी।
धर्मेंद्र जी की ये 5 फिल्में उनकी कलाकारी के अलग-अलग रंग दिखाती हैं। कभी वो प्यारे मोहन बनकर हंसाते हैं, तो कभी वीरू बनकर अपनी दोस्ती के लिए जान देने को तैयार हो जाते हैं। इन फिल्मों के डायलॉग्स आज भी इसलिए याद किए जाते हैं, क्योंकि उनमें सादगी, दम और एक इमोशन है।
तो अब देर किस बात की? इस वीकेंड, इनमें से कोई एक फिल्म देखिए और बॉलीवुड के ही-मैन की दमदार एक्टिंग का मजा लीजिए!
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. धर्मेंद्र की टॉप 5 फिल्में कौन सी हैं जिन्हें हर फैन को देखना चाहिए?
Ans. धर्मेंद्र की कुछ सबसे बेहतरीन फिल्में हैं: शोले, चुपके चुपके, यमला पगला दीवाना, मेरा गांव मेरा देश, और ब्लैकमेल। ये फिल्में कॉमेडी, एक्शन, रोमांस और फैमिली ड्रामा के अलग-अलग रंग दिखाती हैं।
2. 'शोले' फिल्म में धर्मेंद्र का सबसे प्रसिद्ध डायलॉग क्या है?
Ans. 'शोले' (Sholay) में धर्मेंद्र का किरदार, वीरू, अपने दोस्त जय (अमिताभ बच्चन) के लिए जान देने को तैयार रहता है। उनका प्रसिद्ध डायलॉग है: "बसंती, इन कुत्तों के सामने मत नाचना!"
3. धर्मेंद्र, सनी देओल और बॉबी देओल ने एक साथ किस कॉमेडी फिल्म में काम किया है?
Ans. धर्मेंद्र ने अपने दोनों बेटों सनी देओल और बॉबी देओल के साथ मिलकर 'यमला पगला दीवाना' (Yamla Pagla Deewana - 2011) फिल्म में काम किया। यह फिल्म उनकी तिकड़ी की कॉमेडी और इमोशन से भरपूर फैमिली एंटरटेनर है।
